सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर

Veraval (Prabhas Patan), Gujrat — All temples in Gujrat

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर

Veraval (Prabhas Patan), Gujrat
🪔 आरती का समय

Mangala 7:00 AM | Madhyanha 12:00 PM | Sandhya 7:00 PM | Shayan 10:00 PM | Sound & Light Show 8:00 PM

📋 Quick Facts
देवताShiva
TypeJyotirlinga
Open6:00 AM – 10:00 PM
EntryFree | VIP darshan available
Est.Antiquity (Current: 1995)
सर्वोत्तम समयOctober – March
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📜 के बारे में: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर

परिचय — शाश्वत तीर्थ

सोमनाथ मंदिर, जिसे "शाश्वत तीर्थ" या "प्रभास तीर्थ" के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च स्थान रखता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के प्रभास पाटन में स्थित यह भव्य मंदिर साम्राज्यों के उत्थान और पतन का साक्षी रहा है, अनगिनत आक्रमणों से बचा है, और हर बार पहले से अधिक वैभवशाली रूप में पुनर्निर्मित हुआ है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अविनाशी शक्ति का जीवंत प्रमाण है।

सोमनाथ नाम दो संस्कृत शब्दों से बना है — सोम (चंद्रमा) और नाथ (स्वामी) — अर्थात् "चंद्रमा के स्वामी।" हिंदू शास्त्रों के अनुसार, स्वयं चंद्र देव ने यहाँ सोने का मंदिर बनाकर भगवान शिव की आराधना की थी। यहाँ का दिव्य ज्योतिर्लिंग स्वयंभू (स्वतः प्रकट) माना जाता है, जो इसे सृष्टि के सबसे शक्तिशाली और पवित्र लिंगों में से एक बनाता है।

मंदिर के परिसर में एक अनोखा पत्थर का स्तंभ है जिसे बाण स्तंभ कहते हैं। इस पर दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता हुआ एक शिलालेख है, जो बताता है कि इस स्थान और दक्षिण ध्रुव के बीच कोई भूमि नहीं है — यह एक अद्भुत भौगोलिक और आध्यात्मिक चिह्न है जो हर दर्शनार्थी के मन में विस्मय भर देता है।

पौराणिक उत्पत्ति एवं महत्व

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति शिव पुराण और स्कंद पुराण की एक अत्यंत रोचक कथा से जुड़ी है। चंद्रदेव का विवाह प्रजापति दक्ष की 27 पुत्रियों से हुआ था। परंतु चंद्रमा केवल एक पत्नी रोहिणी से ही अत्यधिक प्रेम करते थे और शेष को उपेक्षित करते थे। इससे दुखी होकर 26 पत्नियों ने अपने पिता दक्ष से शिकायत की। क्रोधित दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया: "तुम्हारी कांति दिन-प्रतिदिन क्षीण होती जाएगी।"

श्राप तत्काल प्रभावी होने लगा और चंद्रमा अपनी ज्योति खोने लगे। घबराए हुए चंद्रमा ने ब्रह्माजी से उपाय पूछा। ब्रह्माजी ने उन्हें पश्चिमी तट पर स्थित प्रभास तीर्थ जाकर भगवान शिव की उपासना करने का परामर्श दिया। चंद्रमा इस पवित्र भूमि पर आए, त्रिवेणी संगम में स्नान किया और छः महीनों तक कठोर तपस्या करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का 10 लाख 8 हजार बार जाप किया।

चंद्रमा की अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव दिव्य प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए — यही ज्योतिर्लिंग है। दक्ष के श्राप को पूर्णतः समाप्त न कर पाने के कारण, शिवजी ने मध्यम मार्ग अपनाया: "तुम प्रत्येक मास में 15 दिन (कृष्ण पक्ष) क्षीण होगे और 15 दिन (शुक्ल पक्ष) पुनः वृद्धि पाओगे।" यही कारण है कि आज भी चंद्रमा घटता-बढ़ता रहता है। चूँकि शिवजी यहाँ सोम (चंद्रमा) के नाथ बनकर प्रकट हुए, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को सोमनाथ कहा जाता है।

ऋग्वेद में इस स्थान का उल्लेख प्रभास क्षेत्र के नाम से मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है। कुरुक्षेत्र युद्ध के पश्चात् भगवान कृष्ण भी प्रभास पाटन आए थे और यहीं उन्होंने अपनी लीला समाप्त की। सोमनाथ से मात्र 2 किमी दूर स्थित भालका तीर्थ वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपना नश्वर शरीर त्यागा — जिससे यह क्षेत्र शैव और वैष्णव दोनों के लिए परम पवित्र हो जाता है।

इतिहास — 17 बार ध्वंस, 17 बार पुनर्निर्माण

सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारतीय सभ्यता के इतिहास की सबसे नाटकीय और प्रेरणादायक गाथाओं में से एक है। इस मंदिर पर सदियों में अनेक बार आक्रमण हुए, इसे लूटा और ध्वस्त किया गया — परंतु हर बार यह पुनः उठ खड़ा हुआ, भक्त राजाओं और आम जनता की एकजुट आस्था से।

प्राचीन काल के मंदिर

परंपरा के अनुसार, मूल सोमनाथ मंदिर स्वयं चंद्रदेव ने शुद्ध सोने से बनाया था। बाद में इसे सूर्य देव ने चाँदी से, श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से और फिर सोलंकी राजवंश के राजा भीमदेव ने पत्थर से बनवाया। पत्थर का मंदिर एशिया के सबसे समृद्ध और भव्य मंदिरों में से एक बन गया, जिसमें 300 वादक, 500 नर्तकियाँ और 200 नाई चौबीसों घंटे सेवा करते थे।

महमूद गजनवी का आक्रमण (1024 ई.)

सोमनाथ पर सबसे कुख्यात आक्रमण महमूद गजनवी ने जनवरी 1026 ई. में किया। वह अफगानिस्तान से विशाल सेना लेकर आया, रक्षकों को परास्त किया, मंदिर की अपार संपत्ति लूट ली, शिवलिंग को तोड़ा और मंदिर को जलाकर राख कर दिया। ऐतिहासिक वर्णनों के अनुसार, मंदिर की रक्षा में 50,000 हिंदू भक्तों ने प्राण न्योछावर किए। इसके बावजूद कुछ ही वर्षों में परमार राजा भोज और सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने इसे पुनः बनवाया।

बाद के आक्रमण और पुनर्निर्माण

इसके पश्चात् अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अफजल खान (1299 ई.), मुजफ्फर शाह प्रथम (1395 ई.), महमूद बेगड़ा (1451 ई.) और अंत में औरंगजेब (1706 ई.) ने मंदिर को क्षति पहुँचाई और ध्वस्त किया। हर बार हिंदू राजाओं, रानियों और भक्तों ने इसे पुनः बनवाया — आस्था की शक्ति कभी नहीं डिगी।

आधुनिक पुनर्निर्माण (स्वतंत्रता के बाद)

1947 में भारत की आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ का भ्रमण किया और मंदिर की जर्जर अवस्था देखकर उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने इसे भारत की स्वतंत्रता और हिंदू गौरव के प्रतीक के रूप में पुनः निर्माण करने का संकल्प लिया। ज्योतिर्लिंग की स्थापना 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के करकमलों से हुई। पूर्ण मंदिर परिसर का उद्घाटन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 1 दिसंबर 1995 को किया।

वास्तुकला

वर्तमान सोमनाथ मंदिर कैलाश महामेरु प्रासाद शैली (चालुक्य/मारु-गुर्जर वास्तुकला) का अद्भुत उदाहरण है। प्रमुख विशेषताएँ:

  • मुख्य शिखर: 155 फीट (47 मीटर) ऊँचा
  • ध्वजस्तंभ: 37 फीट ऊँचा
  • बाण स्तंभ: दक्षिण ध्रुव की ओर इंगित करने वाला तीर-स्तंभ
  • सभा मंडप: बारीक नक्काशीदार स्तंभों वाला विशाल प्रार्थना हॉल
  • गर्भगृह: पवित्र सोमनाथ शिवलिंग का आंतरिक गर्भगृह
  • नंदी मंडप: विशाल नंदी प्रतिमा वाला भव्य हॉल
  • सहायक मंदिर: परिसर में पार्वती, गणेश और काशी विश्वनाथ मंदिर

पवित्र त्रिवेणी संगम

सोमनाथ मंदिर के पीछे त्रिवेणी संगम स्थित है — हिरण, कपिला और पौराणिक अंतर्वाहिनी सरस्वती नदियों का पवित्र संगम, जहाँ ये तीनों अरब सागर में मिलती हैं। मंदिर में प्रवेश से पूर्व श्रद्धालु यहाँ पवित्र स्नान करते हैं, यह विश्वास करते हुए कि इससे अनेक जन्मों के पाप धुल जाते हैं।

भालका तीर्थ — जहाँ भगवान कृष्ण ने देह त्यागी

सोमनाथ से मात्र 2 किमी दूर भालका तीर्थ वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण एक पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। जरा नामक एक शिकारी ने भूलवश उनके पाँव को हिरण समझकर बाण चला दिया। कृष्ण ने जरा को क्षमा किया और अपने दिव्य धाम को प्रयाण किया। यहाँ आज एक सुंदर मंदिर बना हुआ है।

आरती एवं दैनिक अनुष्ठान

प्रतिदिन प्रातः मंगला आरती (7:00 बजे) से दिन का शुभारंभ होता है और रात्रि शयन आरती (10:00 बजे) से समापन। श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को विशेष अभिषेक और आरती का आयोजन होता है। प्रतिदिन सायं 8:00 बजे मंदिर परिसर में सोमनाथ के इतिहास और पौराणिक कथा पर आधारित एक भव्य साउंड एंड लाइट शो होता है।

प्रमुख त्योहार

  • महाशिवरात्रि: रात्रि भर पूजा, अभिषेक और भजन। लाखों भक्त सम्मिलित होते हैं।
  • कार्तिक पूर्णिमा: विशाल तीर्थयात्रा और त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान।
  • श्रावण सोमवार: श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार विशेष अभिषेक।
  • नवरात्रि: नौ रात्रियों तक गरबा और भक्ति कार्यक्रम।
  • सोमनाथ मेला: वार्षिक मेला — भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम।

कैसे पहुँचें

वायु मार्ग: दीव हवाई अड्डा (63 किमी) या राजकोट हवाई अड्डा (190 किमी)।
रेल मार्ग: वेरावल रेलवे स्टेशन (6 किमी) — अहमदाबाद, राजकोट और मुंबई से जुड़ा।
सड़क मार्ग: NH-51 से सोमनाथ जुड़ा है। अहमदाबाद (407 किमी), राजकोट (190 किमी), जूनागढ़ (85 किमी) से नियमित बस सेवा।

निकटवर्ती दर्शनीय स्थल

  • भालका तीर्थ (2 किमी) — जहाँ भगवान कृष्ण ने देह त्यागी
  • त्रिवेणी संगम — पवित्र नदी संगम
  • सोमनाथ संग्रहालय — प्राचीन मंदिर के अवशेष
  • गिर राष्ट्रीय उद्यान (50 किमी) — एशियाई शेरों का अंतिम निवास
  • जूनागढ़ (85 किमी) — उपरकोट किला और गिरनार पर्वत
  • द्वारका (235 किमी) — भगवान कृष्ण का चारधाम तीर्थ नगर

आध्यात्मिक महत्व

शिव पुराण में कहा गया है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिनकी कुंडली में चंद्रमा पीड़ित हो, उनके लिए सोमनाथ दर्शन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। चाहे आप श्रद्धालु हों या जिज्ञासु यात्री — सोमनाथ का दर्शन आत्मा पर एक अमिट छाप छोड़ता है।

🗿 Temple Murti / Statue

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग — प्रभास पाटन, गुजरात

Darshan & Aarti Timings

🚪 Darshan Timings

Morning 6 AM–12 PM | Afternoon 12–5 PM | Evening 5–10 PM

🪔 Aarti Schedule

Mangala 7:00 AM | Madhyanha 12:00 PM | Sandhya 7:00 PM | Shayan 10:00 PM | Sound & Light Show 8:00 PM

⭐ Best Time to Visit

October – March

⚠️ Timings may change on festivals, special occasions, or during temple renovation. Please verify with the temple before visiting.

Visitor Information

Entry Fee
Free | VIP darshan available
Dress Code
Traditional/Modest. No shorts inside sanctum.

🗺️ Location & How to Reach

📍
Full Address
Somnath Temple, Prabhas Patan, Veraval, Saurashtra, Gujarat – 362268
✈️
Nearest Airport

Diu Airport (63 km), Rajkot Airport (190 km)

🚂
Nearest Railway Station

Veraval Railway Station (6 km)

🚌
Nearest Bus Stand

Somnath Bus Stand (1 km)

🧭 Detailed Directions

By Air: Diu (63 km) or Rajkot (190 km). By Train: Veraval Station (6 km). By Road: NH-51, buses from Ahmedabad (407 km), Rajkot (190 km), Junagadh (85 km).