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श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर

Mumbai, Maharashtra — सभी मंदिर Maharashtra

🏛️ स्थापित 1801 🎫 Free general darshan is available for devotees. Special darshan, online appointment, personalized online darshan, and pooja booking facilities may be available through the official temple website or app, subject to current rules and availability. During Tuesdays, Sankashti Chaturthi, Angarki Chaturthi, and Ganesh Chaturthi, queues can be long and security checks are strict. Devotees should avoid carrying large bags, restricted offerings, valuables, sharp objects, or unnecessary electronic items inside the temple area. 🕐 5:30 AM – 9:50 PM (may vary) 🕉️ Shree Ganesha
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श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर

Mumbai, Maharashtra
🪔 आरती का समय

सामान्य दिनों में बुधवार से सोमवार काकड़ आरती सुबह 5:30 बजे से 6:00 बजे तक होती है। यह दिन की पहली आरती होती है, जब मंदिर का वातावरण भक्ति और शांति से भर जाता है। दोपहर 12:05 बजे से 12:30 बजे तक श्री सिद्धिविनायक को नैवेद्य अर्पित किया जाता है। शाम 7:00 बजे से 7:10 बजे तक धूप आरती होती है, जिसमें धूप, दीप और मंत्रों से गर्भगृह अत्यंत पवित्र अनुभव होता है। शाम 7:30 बजे से 8:00 बजे तक मुख्य संध्या आरती होती है, जिसमें भक्त बप्पा के सामने गहरी श्रद्धा से प्रार्थना करते हैं। दिन के अंत में शेजारती होती है, जब बप्पा को प्रेमपूर्वक विश्राम अर्पित किया जाता है। मंगलवार को काकड़ आरती सुबह 5:00 बजे से 5:30 बजे तक, रात की पूजा और आरती रात 9:00 बजे से 10:10 बजे तक और शेजारती रात 11:45 बजे होती है।

📋 Quick Facts
देवताShree Ganesha
TypeHindu Temple
Open5:30 AM – 9:50 PM (may vary)
EntryFree general darshan is available for devotees. Special darshan, online appointment, personalized online darshan, and pooja booking facilities may be available through the official temple website or app, subject to current rules and availability. During Tuesdays, Sankashti Chaturthi, Angarki Chaturthi, and Ganesh Chaturthi, queues can be long and security checks are strict. Devotees should avoid carrying large bags, restricted offerings, valuables, sharp objects, or unnecessary electronic items inside the temple area.
Est.1801
सर्वोत्तम समयअक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए …

📜 के बारे में: श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर

श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर की पावन शुरुआत

मुंबई जैसे तेज गति वाले शहर में, जहां हर व्यक्ति अपने सपनों और संघर्षों के साथ आगे बढ़ता है, श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर भक्तों के लिए एक शांत और दिव्य आश्रय की तरह है। प्रभादेवी में स्थित यह मंदिर 19 नवंबर 1801 CE को विधिवत प्रतिष्ठित हुआ था। इस मंदिर के निर्माण से लक्ष्मण विठु पाटिल और देऊबाई पाटिल का नाम श्रद्धा से जुड़ा है। लोकमान्यता के अनुसार देऊबाई पाटिल की इच्छा थी कि भगवान गणेश ऐसे भक्तों, विशेष रूप से संतान की इच्छा रखने वाली माताओं और परिवारों पर कृपा करें, जो सच्चे मन से प्रार्थना लेकर उनके चरणों में आते हैं। उस समय यह स्थान आज जैसा व्यस्त नहीं था। आसपास नारियल के पेड़, खुला वातावरण और एक सरल भक्तिभाव से भरा जीवन था। उसी वातावरण में यह छोटा सा मंदिर धीरे धीरे मुंबई की सबसे बड़ी आस्थाओं में से एक बन गया।

पुराने समय में मंदिर बहुत छोटा था। गर्भगृह के पास एक समय में बहुत कम भक्त दर्शन कर पाते थे, परंतु मंदिर की महिमा हमेशा विशाल रही। लोग दूर दूर से आते थे क्योंकि उनके मन में यह विश्वास था कि सिद्धिविनायक बप्पा सच्ची प्रार्थना अवश्य सुनते हैं। 1936 CE में मंदिर की पूजा व्यवस्था और दैनिक सेवा अधिक व्यवस्थित रूप से प्रारंभ हुई, जिसमें श्री गोविंदराव फाटक का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उन्होंने पूजनीय संत श्री जांभेकर महाराज के निर्देशों के अनुसार सेवा का दायित्व निभाया। समय के साथ भक्तों की संख्या बढ़ती गई और मंदिर प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए ट्रस्ट व्यवस्था विकसित हुई। आज जब कोई भक्त इस मंदिर में प्रवेश करता है, तो वह केवल एक प्रसिद्ध स्थल पर नहीं आता, बल्कि दो सौ वर्षों से अधिक समय से बहती आस्था की पावन धारा में शामिल होता है।

श्री सिद्धिविनायक का आध्यात्मिक महत्व और दाईं सूंड वाली मूर्ति

इस मंदिर के मुख्य आराध्य श्री सिद्धिविनायक हैं, जो श्री गणेश का अत्यंत मंगलकारी और कृपालु रूप है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है, क्योंकि वे विघ्नों को दूर करने वाले विघ्नहर्ता हैं। सिद्धिविनायक नाम भी अपने भीतर गहरा अर्थ रखता है। सिद्धि का अर्थ है सफलता, पूर्णता और आध्यात्मिक उपलब्धि, और विनायक भगवान गणेश का प्रिय नाम है। इसलिए भक्त इस विश्वास से यहां आते हैं कि बप्पा उनके जीवन की बाधाओं को दूर करेंगे और सही मार्ग दिखाएंगे। कोई नौकरी के लिए आता है, कोई व्यापार के लिए, कोई विवाह या संतान के लिए, कोई स्वास्थ्य के लिए और कोई केवल मन की शांति के लिए।

यहां की मूर्ति इसलिए भी विशेष मानी जाती है क्योंकि श्री गणेश की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। गणेश पूजा की परंपरा में दाईं सूंड वाली मूर्ति को अत्यंत शक्तिशाली और जागृत माना जाता है। यह काले पत्थर से बनी एक ही शिला की मूर्ति है, जिसकी ऊंचाई लगभग 2.5 फीट और चौड़ाई लगभग 2 फीट है। बप्पा चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं। उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल है, ऊपरी बाएं हाथ में परशु है, नीचे दाएं हाथ में जपमाला है और नीचे बाएं हाथ में मोदक का पात्र है। गले में सर्प के समान यज्ञोपवीत है और माथे पर एक दिव्य नेत्र दिखाई देता है, जो भगवान शिव की ज्ञानमयी शक्ति का स्मरण कराता है। दोनों ओर रिद्धि और सिद्धि विराजती हैं, जो समृद्धि, सफलता और पूर्णता की प्रतीक हैं।

भक्त यहां अक्सर यह मंत्र श्रद्धा से बोलते हैं: वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा। इसका भाव है कि हे विशाल स्वरूप और सूर्य के समान तेजस्वी प्रभु, मेरे सभी कार्यों के विघ्न दूर करें। सिद्धिविनायक मंदिर में यह मंत्र केवल शब्द नहीं रह जाता, यह भक्त के मन की सच्ची पुकार बन जाता है।

मंदिर की वास्तुकला, नवीनीकरण और दिव्य स्वरूप

श्री सिद्धिविनायक मंदिर का वर्तमान स्वरूप भव्य है, पर इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी भव्यता के भीतर पुराने मंदिर की पवित्रता आज भी सुरक्षित है। पुराने मंदिर में एक सभागृह, गर्भगृह, कुछ खुला स्थान, प्रशासनिक व्यवस्था और सामने जलकुंड जैसा स्वरूप था। समय के साथ मुंबई बढ़ी, भक्तों की संख्या बढ़ी और यह छोटा सा मंदिर विशाल जनआस्था का केंद्र बन गया। भक्तों को सुगम दर्शन मिल सके, इसके लिए मंदिर के विस्तार और नवीनीकरण की योजना बनाई गई। 27 अप्रैल 1990 CE को अक्षय तृतीया के शुभ दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शरद चंद्रजी पवार ने नए प्रकल्प की आधारशिला रखी। लगभग तीन वर्षों में यह नया मंदिर स्वरूप पूर्ण हुआ।

मंदिर की नई वास्तु योजना वास्तुविद श्री शरद आठले और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई। उन्होंने राजस्थान और तमिलनाडु के मंदिरों का अध्ययन किया, पर मुंबई के समुद्रतटीय वातावरण, आर्द्र जलवायु और लंबे मानसून को ध्यान में रखते हुए अंबरनाथ के प्राचीन शिव मंदिर की दृढ़ पत्थर शैली से प्रेरणा ली। आज मंदिर एक बहुकोणीय, छह मंजिला संरचना के रूप में दिखाई देता है। इसके ऊपर स्वर्णमंडित मुख्य गुंबद और अन्य छोटे मुकुट मंदिर को दिव्य आभा देते हैं। पंचधातु और सोने से बने ये शिखर दूर से ही भक्तों को बप्पा की उपस्थिति का अनुभव कराते हैं। गर्भगृह का मखर कुशल कारीगरों द्वारा अत्यंत श्रद्धा से तैयार किया गया।

नवीनीकरण के समय सबसे अधिक ध्यान इस बात पर दिया गया कि मूल मूर्ति की पवित्रता और स्थान अक्षुण्ण रहे। मंदिर बप्पा को हटाकर नहीं, बल्कि उनकी उपस्थिति को केंद्र में रखकर पुनर्निर्मित हुआ। गर्भगृह को अधिक विशाल बनाया गया ताकि अधिक भक्त एक साथ दर्शन कर सकें। प्रथम तल पर पूजा और दर्शन की व्यवस्था है, अन्य तलों पर महा नैवेद्य की रसोई, प्रशासनिक कार्यालय और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं हैं। मंदिर का स्वर्ण गुंबद केवल वास्तु सौंदर्य नहीं है। कई भक्त, जब भीड़ के कारण मूर्ति का स्पष्ट दर्शन नहीं कर पाते, तब गुंबद के दर्शन से भी मन में वही शांति अनुभव करते हैं। यही सिद्धिविनायक की कृपा है कि यहां हर दृष्टि दर्शन बन जाती है।

त्योहार, आरती और भक्ति की दैनिक लय

श्री सिद्धिविनायक मंदिर में प्रत्येक दिन भक्ति से भरा होता है, लेकिन मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी, अंगारकी चतुर्थी, विनायकी चतुर्थी, माघी गणेश जयंती और भाद्रपद गणेश चतुर्थी का महत्व विशेष है। मंगलवार को भगवान गणेश का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन मंदिर बहुत सुबह खुलता है और भक्तों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। कई भक्त व्रत लेकर आते हैं, कई नंगे पैर चलकर पहुंचते हैं, कई अपने जीवन की किसी बड़ी शुरुआत से पहले बप्पा के चरणों में माथा टेकते हैं। त्योहारों के समय मंदिर परिसर में दिव्यता और उत्साह दोनों साथ साथ दिखाई देते हैं।

दिन की शुरुआत काकड़ आरती से होती है। यह आरती भक्त के भीतर भी नई भक्ति जगाती है। दोपहर में बप्पा को नैवेद्य अर्पित किया जाता है। संध्या के समय धूप आरती होती है, जब सुगंध, दीप और मंत्रों से वातावरण अत्यंत पवित्र हो जाता है। इसके बाद मुख्य संध्या आरती होती है, जिसमें भक्तों का भाव और भी गहरा हो जाता है। दिन के अंत में शेजारती होती है, जब बप्पा को प्रेमपूर्वक विश्राम अर्पित किया जाता है। यह केवल दैनिक समय सारिणी नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध की लय है।

गणेश चतुर्थी के समय सिद्धिविनायक मंदिर की छटा देखते ही बनती है। पूरे मुंबई की आस्था जैसे प्रभादेवी में एकत्र हो जाती है। बप्पा का विशेष श्रृंगार, पूजा, अभिषेक और भक्तों की अपार भीड़ इस पर्व को अद्भुत बना देती है। माघी गणेश जयंती भी यहां बहुत श्रद्धा से मनाई जाती है। संकष्टी चतुर्थी पर भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद पूजा पूर्ण करते हैं। भक्त अक्सर ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करते हैं, जिसका भाव है कि मैं विघ्नों को दूर करने वाले श्री गणपति को प्रणाम करता हूं। इस मंत्र की ध्वनि जब मन में उतरती है, तो भक्त को लगता है कि बप्पा ने उसकी चिंता अपने हाथों में ले ली है।

प्रभादेवी में दर्शन का अनुभव

सिद्धिविनायक मंदिर का दर्शन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुंबई की जीवित आस्था का अनुभव है। मंदिर तक पहुंचने से पहले ही भक्तिभाव का वातावरण महसूस होने लगता है। आसपास की गलियों में प्रसाद की दुकानें, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन के लिए बढ़ते भक्त और गणपति बप्पा मोरया की ध्वनि मन को धीरे धीरे मंदिर के भाव में ले आती है। कोई भक्त दफ्तर जाने से पहले आता है, कोई अस्पताल से रिपोर्ट मिलने के बाद, कोई बच्चे को लेकर पहली बार आता है, कोई परीक्षा या नए काम से पहले। यह मंदिर हर वर्ग, हर उम्र और हर परिस्थिति के भक्त को समान प्रेम से स्वीकार करता है।

मंगलवार और त्योहारों पर कतार लंबी हो सकती है, लेकिन प्रतीक्षा भी यहां साधना बन जाती है। जैसे जैसे भक्त गर्भगृह के पास पहुंचता है, मन की बेचैनी कम होने लगती है। घंटियों की ध्वनि, मंत्रों की गूंज, आरती का प्रकाश और बप्पा का नाम, यह सब मिलकर ऐसी अनुभूति देते हैं जिसे केवल महसूस किया जा सकता है। जब मूर्ति का दर्शन होता है, भले ही कुछ क्षणों के लिए हो, तो भक्त को लगता है कि बप्पा ने सीधे उसकी ओर देखा है। दाईं सूंड वाला स्वरूप, हाथ में मोदक, पास में रिद्धि सिद्धि और स्वर्णमय गर्भगृह का वातावरण दर्शन को अविस्मरणीय बना देता है।

सिद्धिविनायक की विशेषता यह है कि यह मंदिर केवल बड़े अनुष्ठानों का स्थान नहीं लगता, बल्कि भक्तों के हृदय का अपना घर लगता है। कोई रोते हुए आता है और शांत होकर लौटता है। कोई उलझन लेकर आता है और मन में दिशा लेकर जाता है। कोई सफलता मिलने पर धन्यवाद देने आता है। यही बप्पा की करुणा है। वे भक्त के शब्दों से अधिक उसके मन को सुनते हैं। इसलिए सिद्धिविनायक का दर्शन एक बार नहीं, जीवन भर याद रहने वाली अनुभूति बन जाता है।

भक्त सिद्धिविनायक क्यों आते हैं

भक्त सिद्धिविनायक मंदिर अलग अलग कारणों से आते हैं, लेकिन हर कारण के पीछे एक ही भाव होता है, विश्वास। विद्यार्थी पढ़ाई और बुद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। माता पिता अपने बच्चों की सुरक्षा और सफलता मांगते हैं। नए विवाहित दंपत्ति गृहस्थ जीवन में प्रेम और स्थिरता की कामना करते हैं। व्यापारी नए कार्य से पहले बप्पा का आशीर्वाद लेते हैं। कई भक्त ऐसे भी आते हैं जिन्हें कोई मांग नहीं होती, वे केवल बप्पा के सामने बैठकर मन हल्का करना चाहते हैं। यही इस मंदिर की गहराई है कि यहां मांगने वाला भी भक्त है और धन्यवाद देने वाला भी भक्त है।

गणेश भक्ति हमें यह भी सिखाती है कि विघ्न केवल बाहर नहीं होते। कई बार सबसे बड़ा विघ्न मन का भय, संदेह, अहंकार, क्रोध या अधीरता होता है। श्री सिद्धिविनायक भक्त को बाहरी सफलता के साथ आंतरिक संतुलन का भी आशीर्वाद देते हैं। रिद्धि और सिद्धि का बप्पा के साथ विराजमान होना हमें बताता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन नहीं, बल्कि शांति, सद्बुद्धि, संयम और संतोष भी है। इसलिए भक्त बार बार लौटकर आते हैं। वे केवल मनोकामना पूरी होने के लिए नहीं आते, बल्कि बप्पा से जुड़े रहने के लिए आते हैं।

LiveDarshanHub.com पर श्री सिद्धिविनायक का मंदिर पृष्ठ केवल समय, पता और यात्रा जानकारी देने वाला पृष्ठ नहीं होना चाहिए। यह ऐसा पृष्ठ होना चाहिए जिसे पढ़कर भक्त के मन में दर्शन की भावना जागे। कोई मुंबई जाकर दर्शन करना चाहे, कोई सिद्धिविनायक आरती समय जानना चाहे, कोई दूर बैठकर लाइव दर्शन करना चाहे, हर भक्त की यात्रा का केंद्र बप्पा की कृपा ही है। सिद्धिविनायक बप्पा जिसे बुलाते हैं, वह किसी न किसी रूप में उनके दर्शन तक पहुंच ही जाता है।

हृदय से भक्तिपूर्ण समापन

श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर की महिमा केवल उसकी प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि उस अनुभूति में है जो भक्त के मन में दर्शन के बाद रह जाती है। बाहर मुंबई अपनी रफ्तार में चलती रहती है, पर मंदिर के भीतर बप्पा के सामने वही शहर सिर झुकाकर शांत हो जाता है। यह मंदिर हमें सिखाता है कि हर शुभ कार्य विनम्रता से शुरू होना चाहिए और हर सफलता का आधार ईश्वर की कृपा है। यहां कुछ क्षणों का दर्शन भी जीवन में नई शक्ति दे सकता है। मन में विश्वास जगता है कि जब बप्पा साथ हैं, तो कोई बाधा इतनी बड़ी नहीं कि पार न की जा सके।

श्री सिद्धिविनायक सभी भक्तों को बुद्धि, स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति और निर्मल भक्ति प्रदान करें। गणपति बप्पा मोरया।

May Shri Siddhivinayak bless every devotee with wisdom, courage, prosperity, and a peaceful heart. Ganpati Bappa Morya.

Darshan & Aarti Timings

🚪 Darshan Timings

Darshan is available throughout the day with peak crowds on Tuesdays and festivals.

🪔 Aarti Schedule

Multiple daily aartis including Kakad Aarti and evening aarti. Verify exact timings from official source.

⭐ Best Time to Visit

October to March

⚠️ Timings may change on festivals, special occasions, or during temple renovation. Please verify with the temple before visiting.

Visitor Information

Entry Fee
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Dress Code
Modest traditional attire preferred

🗺️ Location & How to Reach

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Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport — ~12 km

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🧭 Detailed Directions

The temple is well connected by Mumbai’s local train network, buses, and taxis. The nearest railway station is Dadar, from where the temple is easily accessible by taxi or auto. Visitors arriving by air can reach the temple via cab from Mumbai Airport.